हम सब जो अपनी जिंदगी में पेरेंट्स बनते हैं और पेरेंट्स बनकर जब हम रिश्तों की और मोहब्बत की बारहखड़ी को समझते हैं। उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। बच्चे हमारी मोहब्बत तो होते ही हैं लेकिन वो हमारी जिम्मेदारी भी होते हैं। उन्हें अच्छा पढ़ाना लिखाना , उनकी फीस देना। उनके लिए कौन सा कॉलेज सही रहेगा और नहीं हम इन बातों में उलझे रहते हैं। हमें मज़ा भी आता है। कोई हमसे कुछ कहता नहीं है लेकिन कहीं ना कहीं हम अपने बच्चों की खुशी में ही खुशियां ढूंढने लगते हैं। और जब बात उनकी शादी की होती है तो वो चीज हमें एक पेरेंट होने के नाते यह अहसास करा देती है कि बच्चे अब बड़े हो गए और हम जिम्मेदारी से मुक्त हो गए। लेकिन शायद यहीं हम कुछ चूक जाते हैं। उनका परिवार है चाहे बेटा हो या बेटी हम सब इस बात को समझते हैं कि बच्चों की शादी हो जाती है तो वो बड़े हो जाते हैं। वो अपने बच्चों के साथ आगे बढ़ते हैं और उन्हें इस तरह बढ़ता हुआ देखना हमें पसंद होता है। लेकिन बच्चों को इस बात का अहसास कराइए कि आप उनके लिए हमेशा हैं। अगर वो परेशान हैं तो आपके साथ अपनी तकलीफें वो जब चाहें तब साझा कर सकते हैं। ऐसा न...