Skip to main content

आर्यन खान हैं पिता शाहरूख की तरह ही बातों से दिल जीतने में माहिर


 बॉलीवुड के किंग खान सदियों से न सिर्फ पर्दे पर बल्कि लोगों के दिलों पर भी राज करते आ रहे हैं। इसकी वजह सिर्फ उनकी अदाकारी ही नहीं है। उनकी शख्सियत के लोग दीवाने हैं। फिर चाहे वो उनका बात करने का अंदाज़ हो या फिर लोगों के साथ उनका बर्ताव। बॉलीवुड में चाहे वो कोई सपोर्टिव कलाकार हो या बड़ा कलाकार सभी शाहरूख के अदब और सलीके के क़ायल हैं। यही झलक उनके बेटे आर्यन में भी देखने को मिली। आर्यन अपनी आने वाली वेब सीरीज ‘बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ के प्रीव्यू के मौके पर पहली बार मीडिया से रूबरू हुए। पहले इवेंट में ही वे न सिर्फ मीडिया बल्कि प्रीव्यू में शामिल सभी लोगों पर अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे। आर्यन की वेब सीरीज के प्रीव्यू में जहां बड़े-बड़े सितारे उनकी काबिलियत के कसीदे गढ़ते थक नहीं रहे थे, वहीं आर्यन विनम्रता से अपनी कमियों के साथ लोगों से उनकी गलतियों को अनदेखा करने की गुज़ारिश कर रहे थे। आइए जानते हैं किंग खान के बेटे आर्यन में आखिर क्या समानता देखने को मिली।

पिता की तरह ही ह्यूमर के साथ माहौल बनाने में हैं माहिर

शाहरूख खान जब भी किसी इवेंट की कमान संभालते हैं, उनके ह्यूमर से उस इवेंट में चार चांद लग जाते हैं। वो चुटीले अंदाज़ में बातें कर लोगों की फिरकी लेने में भी माहिर हैं। कुछ इसी तरह आर्यन भी अपने पहले ही इवेंट में नज़र आए। पिता के साथ इवेंट की बागडोर संभालते हुए आर्यन ने अपने नर्वस होने की बात को मजाकिया अंदाज़ में पेश किया। एक ही लाइन को तीन-चार बार बोलने के बाद उन्होंने कहा कि अब टेलीप्रॉम्पटर बंद हो चुका है तो अब जो भी बोलेगा मेरा शो ही बोलेगा। आपको बता दें आर्यन ने इवेंट के दौरान कहा था कि वे काफी नर्वस हैं। उन्होंने स्पीच की प्रैक्टिस कई रातों को जागकर की है। यहां तक कि उन्होंने स्पीच को टेलीप्रॉम्पटर पर भी लिखवा दिया है और अगर लाइट चली जाए तो उसके लिए वे पेपर पर भी लिखकर लाए हैं, टॉर्च के साथ।

विनम्रता की भी दिखी झलक

जिस तरह शाहरूख इंडस्ट्री में विनम्र स्वभाव के लिए जाने जाते हैं, ठीक वही झलक आर्यन में भी देखने को मिली। आर्यन खान इवेंट के दौरान गलती होने पर उसे संभालने के लिए शाहरूख के होने की बात करते नज़र आए। उन्होंने कहा कि अगर गलती हो गई तो पापा तो हैं ही। यही नहीं उसके बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि उसके बाद भी अगर कुछ हो तो वे उन्हें माफ़ कर दें। यही नहीं, सीरीज़ की क्रू को मीडिया से मिलने के लिए बुलाने के बाद वे खुद सभी कलाकारों को स्टेज पर लाने के लिए आगे बढ़े। ये उनकी शख्सियत के विनम्र स्वभाव और लोगों के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

काम के प्रति समर्पण

आर्यन फिल्म इंडस्ट्री में बतौर एक्टर नहीं बल्कि डायरेक्टर कदम रखने जा रहे हैं। उनकी वेब सीरीज़ की चर्चा लंबे समय से हो रही है। फिर चाहे वो इसकी कास्टिंग को लेकर हो या इसकी स्टोरी को लेकर। उन्होंने सीरीज़ की कहानी लिखने से लेकर एक-एक कैरेक्टर के लिए कास्टिंग बहुत सोच-समझकर की है। यही नहीं, इवेंट के दौरान बॉबी देओल ने कास्टिंग के समय की एक घटना बताई जिससे काम के प्रति आर्यन की शिद्दत समझ में आती है। बॉबी बिना स्क्रिप्ट पढ़े ही सीरीज़ करने के लिए तैयार हो गए थे, लेकिन आर्यन ने उन्हें खुद नैरेशन के लिए बुलाया। यही नहीं, सात घंटे तक आर्यन ने बॉबी के साथ स्क्रिप्ट और कैरेक्टर पर बात की। बॉबी देओल ने इवेंट में कहा कि वे सिर्फ आर्यन को देख रहे थे। अपने बच्चों को सफल होते देखना सभी चाहते हैं लेकिन काम के प्रति उनका जुनून देख उन्हें काफी अच्छा लगा।

आत्मविश्वास और सफलता की ज़िद

हम सभी शाहरूख खान के स्ट्रगल के दिनों से उनकी सफलता के शिखर तक पहुंचने की यात्रा के बारे में जानते हैं। आप किसी काम में कितना सफल होंगे ये आपकी अप्रोच पर भी निर्भर करता है। शाहरूख कई बार इंटरव्यू में ये कहते नज़र आए हैं कि वे सुबह उठकर खुद से कहते हैं कि वो बेस्ट हैं, उनका काम उनसे बेहतर कोई नहीं कर सकता। कई असफल फिल्मों के बाद जब लोगों को लगने लगा कि उनका दौर ख़त्म हो गया, शाहरूख ने सबको ग़लत साबित कर पठानसे इंडस्ट्री में फिर अपनी जगह पाई। आर्यन ने भी जीवन के उस दौर में बुरा समय देखा जब बच्चे अपने करियर बनाने में व्यस्त होते हैं। लेकिन उन्होंने उस दौर को अपने जीवन के आड़े नहीं आने दिया न ही अपने ऊपर हावी होने दिया। आर्यन ने जेल से निकलने के बाद खुद का मुकाम बनाने की ज़िद ठानी और शाहरूख के सपोर्ट को लेने की बजाय निर्देशन में कदम रखने का फैसला लिया। जहां बहुत से लोगों को बुरा दौर तोड़ देता है, आर्यन ने अपने भविष्य को सँवारने की ज़िम्मेदारी संभाली और आत्मविश्वास से आगे बढ़े।

सफलता और असफलता की कहानी आर्यन खुद लिखने की तैयारी कर चुके हैं। पिता की तरह ही बॉलीवुड पर राज करने के लिए आर्यन की तैयारी उन्हें किस मुकाम पर पहुंचाएगी ये तो वक़्त आने पर पता चलेगा। लेकिन इस बात में दो राय नहीं है कि मेहनत और जीवन के प्रति सकारात्मक सोच उन्हें आगे बढ़ने में ज़रूर मदद करेगी।

Comments

Popular posts from this blog

चलो बचपन वाली दोस्ती फिर से कर लेते हैं

  हर साल अगस्त के पहले संडे को फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है। फ्रेंड्स की हमारी ज़िंदगी में क्या अहमियत है यह बात किसी से छिपी नहीं है। बनती-बिगड़ती इस आपाधापी से भरी ज़िंदगी में दोस्त ही तो होते हैं जो हमारे लिए किसी ठंडी मीठी हवा से कम नहीं होते। अगर आप उनमें से हैं जिनकी स्कूल-कॉलेज के ज़माने की दोस्तियां आपकी ज़िंदगी में आज भी कायम हैं तो आप बहुत किस्मत वाले हैं। बचपन वाले हमारे उन दोस्तों की बात ही अलग है। उनके साथ बैठना , बातें करना अपने आप में एक बहुत बड़ी स्ट्रेस बस्टर थेरेपी है। लेकिन इस दोस्ती को संभालकर रखने की भी ज़रूरत है। जानते हैं वो बातें जो आपकी दोस्ती को बनाएंगी और गहरा। शिकायतों को कहें बाय अब हम सभी लोग ज़िंदगी में इतने बिजी हैं कि बैठकर बातें कर लें यही बहुत है। अब आप अपने बेस्ट फ्रेंड से भी यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वो आपको बहुत टाइम दे। इसलिए टाइम को लेकर एक-दूसरे को उलहाना ना दें। बल्कि इन शिकायतों को अपनी ज़िंदगी से बाय ही कह दीजिए। जो भी वक़्त मिले आपको एक-दूसरे के साथ उसे जी भर के जी लिजिए। अगर वक़्त की कमी के चलते मिल भी नहीं पा रहे तो भी कोई बात नहीं , एक-दूसरे की ख़ै...

ओटीटी पर मौजूद ये वेब सीरीज टीनएजर्स के‍ लिए हैं परफेक्ट बिंज वॉच

  टीनएजर्स के लिए ओटीटी पर कंटेंट की वैसे तो कमी नहीं है। लेकिन नब्बे के दशक के पेरेंट्स उनके दौर जैसे साफ-सुथरे शोज को अपने बच्चों के लिए तरजीह देते हैं। पेरेंट्स ओटीटी पर मौजूद कंटेंट में बच्चों के देखने लायक कंटेंट ढूंढने की कोशिश करते हैं जो कि काफी कम हैं। जिसकी वजह से बच्चों की सीरीज या उनके स्क्रीन पर नजर बनाए रखने का काम भी पेरेंट्स को करना पड़ता है। मगर ओटीटी पर कुछ ऐसी वेब सीरीज भी हैं जिन्हें बच्चे देख सकते हैं और आपको उन पर नजर रखने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। आप चाहें तो बच्चों के साथ इन सीरीज का आनंद उठा उनके स्क्रीन बडी भी बन सकते हैं। जस्ट ऐड मैजिक प्राइम वीडियो पर मौजूद ये वेब सीरीज ट्वीन्‍स को पसंद आएगी। इस सीरीज में मैजिक के साथ दोस्ती की कहानी दिखाई गई है। सीरीज में तीन दोस्तों को एक मैजिकल कुकिंग बुक मिलती है , जिसमें समस्याओं का मैजिकल सॉल्यूशन मौजूद है। इस बुक के सहारे वे अपनी लाइफ की छोटी-छोटी समस्याओं को सुलझाती हैं। लेकिन उन्हें उस बुक से जुड़े रहस्यों का अंदाजा ही नहीं होता। उनकी मुश्किलें तब बढ़ जाती हैं जब उन्हें पता चलता है कि वो किताब पहले उनकी दादी के प...

ग्लोबल फुटप्रिंट पर राजस्थानी महक घेवर ने बनाई अपनी पहचान

  राजस्थान के ज़ायके की अपनी एक अलग पहचान है। चाहे दाल बाटी चूरमा हो , कैर-सांगरी की सब्जी , लाल मांस , मिर्च के टिपारे , लहसुन की चटनी — अगर आप कभी न कभी राजस्थान आए हैं या राजस्थान की महक के बारे में सुना होगा तो आपने इस स्वाद को भी चखा होगा। ऐसा ही स्वाद से भरपूर और परंपराओं से भरी इस माटी की एक पारंपरिक मिठाई है घेवर । जो वैसे तो अब साल भर ही मिलता है लेकिन सावन में इसके स्वाद का अपना एक अलग ही आनंद है। लेकिन अब इसी पारंपरिक मिठाई ने ग्लोबल लेवल पर अपना एक सिग्नेचर छोड़ दिया है। ऐसे मिली पहचान हुआ यूं कि ऑस्ट्रेलिया के मास्टरशेफ में एक प्रतियोगी ने इसे बनाया — दीपेंद्र छिब्बड़ ने इसे बनाया — और प्रतियोगिता के जजों ने न केवल इसे एप्रिशिएट किया बल्कि यह "बॉस रेसिपी" का खिताब भी अपने नाम करने में कामयाब रहीं। जज हैरान रह गए जब उन्हें इसके प्रोसेस के बारे में पता चला कि किस तरह एक बर्फ की मानिंद ठंडे मैदे के बैटर को बड़ी ही कारीगरी से गर्म तेल में आहिस्ता-आहिस्ता डाला जाता है और वह एक प्रॉपर शेप में जाली का आकार लेता है। वक्त भी है ,  मौका भी है ,  दस्तूर भी इस वक्त ग्लोब...