‘ हारकर जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं ’ शाहरुख खान की फिल्म बाजीगर का ये डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है। ये डायलॉग बड़े पर्दे पर बोल सालों से फिल्मी दुनिया पर राज करने वाले किंग खान असल जिंदगी में भी बाजीगर ही हैं। मुंबई में फिल्मी सफर शुरू करने से लेकर सफलता के शिखर तक उन्हें कई बार हार देख उसे जीत में बदला। जब उनपर फ्लॉप फिल्मों का टैग लगा उसके बाद उन्होंने खुद को वापस एक्शन हीरो के रूप में स्थापित कर दर्शकों को प्रभावित किया। सालों के फिल्मी करियर और सफल फिल्मों के बाद अब किंग खान को नेशनल अवॉर्ड मिला। उनकी सालों की मेहनत रंग तो लाई लेकिन ये जीत आधी ही उनके हिस्से आई। बेस्ट एक्टर अवॉर्ड में प्राइज मनी के रूप में मिलने वाली धनराशि आधी ही मिली। क्या आप जानते हैं कि अवॉर्ड मिलने के बावजूद उन्हें आधी धनराशि क्यों मिली। आइए बताते हैं आपको इस बारे में। शाहरुख और विक्रांत मैसी को बेस्ट एक्टर अवॉर्ड है वजह 71 वें नेशनल अवॉर्ड में शाहरुख खान को जवान फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर अवॉर्ड दिया गया है। फिल्मी दुनिया में उनके 33 साल के सफर में उन्होंने कई सुपरहिट फिल्में दी। यही नहीं...
हम सब जो अपनी जिंदगी में पेरेंट्स बनते हैं और पेरेंट्स बनकर जब हम रिश्तों की और मोहब्बत की बारहखड़ी को समझते हैं। उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। बच्चे हमारी मोहब्बत तो होते ही हैं लेकिन वो हमारी जिम्मेदारी भी होते हैं। उन्हें अच्छा पढ़ाना लिखाना , उनकी फीस देना। उनके लिए कौन सा कॉलेज सही रहेगा और नहीं हम इन बातों में उलझे रहते हैं। हमें मज़ा भी आता है। कोई हमसे कुछ कहता नहीं है लेकिन कहीं ना कहीं हम अपने बच्चों की खुशी में ही खुशियां ढूंढने लगते हैं। और जब बात उनकी शादी की होती है तो वो चीज हमें एक पेरेंट होने के नाते यह अहसास करा देती है कि बच्चे अब बड़े हो गए और हम जिम्मेदारी से मुक्त हो गए। लेकिन शायद यहीं हम कुछ चूक जाते हैं। उनका परिवार है चाहे बेटा हो या बेटी हम सब इस बात को समझते हैं कि बच्चों की शादी हो जाती है तो वो बड़े हो जाते हैं। वो अपने बच्चों के साथ आगे बढ़ते हैं और उन्हें इस तरह बढ़ता हुआ देखना हमें पसंद होता है। लेकिन बच्चों को इस बात का अहसास कराइए कि आप उनके लिए हमेशा हैं। अगर वो परेशान हैं तो आपके साथ अपनी तकलीफें वो जब चाहें तब साझा कर सकते हैं। ऐसा न...