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ओटीटी पर मौजूद ये वेब सीरीज टीनएजर्स के‍ लिए हैं परफेक्ट बिंज वॉच

  टीनएजर्स के लिए ओटीटी पर कंटेंट की वैसे तो कमी नहीं है। लेकिन नब्बे के दशक के पेरेंट्स उनके दौर जैसे साफ-सुथरे शोज को अपने बच्चों के लिए तरजीह देते हैं। पेरेंट्स ओटीटी पर मौजूद कंटेंट में बच्चों के देखने लायक कंटेंट ढूंढने की कोशिश करते हैं जो कि काफी कम हैं। जिसकी वजह से बच्चों की सीरीज या उनके स्क्रीन पर नजर बनाए रखने का काम भी पेरेंट्स को करना पड़ता है। मगर ओटीटी पर कुछ ऐसी वेब सीरीज भी हैं जिन्हें बच्चे देख सकते हैं और आपको उन पर नजर रखने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। आप चाहें तो बच्चों के साथ इन सीरीज का आनंद उठा उनके स्क्रीन बडी भी बन सकते हैं। जस्ट ऐड मैजिक प्राइम वीडियो पर मौजूद ये वेब सीरीज ट्वीन्‍स को पसंद आएगी। इस सीरीज में मैजिक के साथ दोस्ती की कहानी दिखाई गई है। सीरीज में तीन दोस्तों को एक मैजिकल कुकिंग बुक मिलती है , जिसमें समस्याओं का मैजिकल सॉल्यूशन मौजूद है। इस बुक के सहारे वे अपनी लाइफ की छोटी-छोटी समस्याओं को सुलझाती हैं। लेकिन उन्हें उस बुक से जुड़े रहस्यों का अंदाजा ही नहीं होता। उनकी मुश्किलें तब बढ़ जाती हैं जब उन्हें पता चलता है कि वो किताब पहले उनकी दादी के प...

ग्लोबल फुटप्रिंट पर राजस्थानी महक घेवर ने बनाई अपनी पहचान

  राजस्थान के ज़ायके की अपनी एक अलग पहचान है। चाहे दाल बाटी चूरमा हो , कैर-सांगरी की सब्जी , लाल मांस , मिर्च के टिपारे , लहसुन की चटनी — अगर आप कभी न कभी राजस्थान आए हैं या राजस्थान की महक के बारे में सुना होगा तो आपने इस स्वाद को भी चखा होगा। ऐसा ही स्वाद से भरपूर और परंपराओं से भरी इस माटी की एक पारंपरिक मिठाई है घेवर । जो वैसे तो अब साल भर ही मिलता है लेकिन सावन में इसके स्वाद का अपना एक अलग ही आनंद है। लेकिन अब इसी पारंपरिक मिठाई ने ग्लोबल लेवल पर अपना एक सिग्नेचर छोड़ दिया है। ऐसे मिली पहचान हुआ यूं कि ऑस्ट्रेलिया के मास्टरशेफ में एक प्रतियोगी ने इसे बनाया — दीपेंद्र छिब्बड़ ने इसे बनाया — और प्रतियोगिता के जजों ने न केवल इसे एप्रिशिएट किया बल्कि यह "बॉस रेसिपी" का खिताब भी अपने नाम करने में कामयाब रहीं। जज हैरान रह गए जब उन्हें इसके प्रोसेस के बारे में पता चला कि किस तरह एक बर्फ की मानिंद ठंडे मैदे के बैटर को बड़ी ही कारीगरी से गर्म तेल में आहिस्ता-आहिस्ता डाला जाता है और वह एक प्रॉपर शेप में जाली का आकार लेता है। वक्त भी है ,  मौका भी है ,  दस्तूर भी इस वक्त ग्लोब...

चलो बचपन वाली दोस्ती फिर से कर लेते हैं

  हर साल अगस्त के पहले संडे को फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है। फ्रेंड्स की हमारी ज़िंदगी में क्या अहमियत है यह बात किसी से छिपी नहीं है। बनती-बिगड़ती इस आपाधापी से भरी ज़िंदगी में दोस्त ही तो होते हैं जो हमारे लिए किसी ठंडी मीठी हवा से कम नहीं होते। अगर आप उनमें से हैं जिनकी स्कूल-कॉलेज के ज़माने की दोस्तियां आपकी ज़िंदगी में आज भी कायम हैं तो आप बहुत किस्मत वाले हैं। बचपन वाले हमारे उन दोस्तों की बात ही अलग है। उनके साथ बैठना , बातें करना अपने आप में एक बहुत बड़ी स्ट्रेस बस्टर थेरेपी है। लेकिन इस दोस्ती को संभालकर रखने की भी ज़रूरत है। जानते हैं वो बातें जो आपकी दोस्ती को बनाएंगी और गहरा। शिकायतों को कहें बाय अब हम सभी लोग ज़िंदगी में इतने बिजी हैं कि बैठकर बातें कर लें यही बहुत है। अब आप अपने बेस्ट फ्रेंड से भी यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वो आपको बहुत टाइम दे। इसलिए टाइम को लेकर एक-दूसरे को उलहाना ना दें। बल्कि इन शिकायतों को अपनी ज़िंदगी से बाय ही कह दीजिए। जो भी वक़्त मिले आपको एक-दूसरे के साथ उसे जी भर के जी लिजिए। अगर वक़्त की कमी के चलते मिल भी नहीं पा रहे तो भी कोई बात नहीं , एक-दूसरे की ख़ै...